Yusuf

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प्रेम इबादत


प्रेम सबसे सरल 
इबादत है... 
   बहते पानी जैसी ... 

ना इस को किसी शब्द की ज़रूरत.. 
ना किसी ज़ुबान की मोहताजी.. 
ना किसी वक़्त की पाबंदी.. 
और ना ही कोई मजबूरी... 
किसी को सिर झुकाने की.. 

 प्रेम से ज़िन्दगी जीते-जीते.. 
      यह इबादत अपने आप.. 
हर वक़्त होती रहती है.. 
और जहाँ पहुँचना है ... 
   वहाँ पहुँचती रहती है.

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8 Comments

Sushi saxena

16-Jan-2024 09:34 PM

Nice

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Tabassum

13-Jan-2024 07:21 PM

❤️❤️

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Varsha_Upadhyay

09-Jan-2024 11:41 AM

Nice

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